ग़ज़ल

कदम दर कदम रिश्ते तोड़ते गए
हम ऐसे अपने सामान छोड़ते गए

आस पास हैं सभी, फिर भी नहीं कोई
हम अपने सारे भरम यूँ तोड़ते गए

ज़िन्दगी तू यूँ ही है या मतलब है तेरा
हर जवाब में ये सवाल खोजते गए

15.6.16

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