आस्था

ईश्वर के बारे में सोचते हुए
मुझे शेक्सपियर की याद आती है

या अठारवीं सदी के किसी कवि की

और खुद को मैं एक अक्षर मात्र सा पाता हूँ
जिसे ईश्वर ने मरने से पहले लिखा हो

शेक्सपीयर भी मरने के बाद जीवित है
जैसे ईश्वर हममें

लेकिन अंत में हम सिर्फ अक्षर मात्र हैं
और किताब में शब्द बहुत हैं

1.11.18

एक नकली कविता

मैं कभी-कभी कहानी लिखने की सोचता हूँ
और दिन के अंत तक एक नकली कविता लिख लेता हूँ

एक नकली कहानी लिखने से बहुत अच्छा
एक नकली कविता लिखना है
कहानी ज़्यादा वक़्त माँगती है
इस तरह मैं अपना और अपने जान-पहचान वालों का
समय बचा लेता हूँ

कहानी लिखने की प्रक्रिया में
मैंने खुद को अधिक परेशान पाया है
-झूठी कविता परेशान नहीं करती

मुझे दुख सिर्फ इस बात का है कि
मैं सच बोलने की कोशिश में और अधिक झूठ बोल रहा होता हूँ

एक और दुख है-
मैं कई लोगों की 'सच्ची' कविता पढ़ता हूँ
ये जानते हुए कि वो बेहद झूठे हैं

22.10.18

अंतिम संवाद

कई कई बार
हम नहीं जानते कि अमुक व्यक्ति से
ये हमारा अंतिम संवाद है

सारे संवाद एक संभावना की छोर
पर छोड़े जाते हैं

मेरे स्कूल के कई दोस्तों से
मेरी अंतिम बात कब हुई
मुझे याद नहीं

काम के सिलसिले में मिले
कुछ अच्छे लोगों से अंतिम बात
अब याद नहीं

कई साथी बने
कई जगह घूमे
उनके साथ भी एक अंतिम संवाद हुआ
अब याद नहीं

कुछ लोगों से प्रेम हुआ
कुछ के साथ सपने देखे
धीरे धीरे हम अपने जीवन में
व्यस्त हुए
उनके साथ अंतिम संवाद
कहाँ याद है

हमें कोई अच्छी बात याद नहीं रहती

जिन लोगों से झगड़ कर अलग हुए,
उनसे हुई अंतिम बात
दिल में घर कर गयी
वो हमें अब तक याद है

13.10.18

कहानी

सबके पास एक कहानी है
और सब एक दूसरे को
बारी बारी से वही कहानी सुना रहे हैं

कहानी सुनते हुए हम भूल जाते हैं
कि असली कहानी कौन सी थी, किसकी थी

घूमते फिरते कहानियाँ इधर उधर खो जाती हैं

तुम्हारी कहानी किसी और से सुनी है मैंने
अच्छी है
लेकिन मैं क्या कह रहा था...
इसको दूसरे तरीके से कह सकते हैं क्या?

मैंने कई साल तक अपनी कहानी बचा कर रखी
कि अकेले में तुम्हें सुनाऊँगा
लेकिन हम कभी अकेले नहीं मिले

जब सब लोग तुम्हारी कहानी सुन लेंगे
तब मिलना मुझसे
तुम्हारी सुनी
और मेरी अनसुनी कहानी के मिलने से
एक नई कहानी शुरू हो सकती है
ऐसा मुझे लगता है

25.8.18

वो

वो फुरसत के पल ढूँढता है
वो शहर में जंगल ढूँढता है

मिलते कहाँ दोस्त बिछड़े हुए
नए लोगों में पुराने ढूँढता है

बरसा, आंधी, गरमी ठीक है
वो बस पल सुहाने ढूँढता है

इतने समझदार लोग हैं यहाँ
वो दो-चार दीवाने ढूँढता है

कुछ खो सा गया पा कर भी
वो बीते ज़माने ढूँढता है

10.08.18

अंतरिक्ष में संदेश

मैं एक कविता बुदबुदा रहा था
और कविता कहते कहते भूल गया

मैं एक कहानी सोच रहा था
और कहानी सोचते सोचते खो गयी

इतना कुछ खोया कि
कविता कहानी का खोना
कुछ खोना नहीं लगता

कविता का भूलना
सबसे बड़ा दुःख होता है उस दिन का
कहानी का खोना
अनकहा दर्द होता है

मैं कई दिनों तक कुछ नहीं लिखता
अपने शब्द बचा कर रखता हूँ

और एक दिन शब्दों का झुंड अंतरिक्ष में छोड़ देता हूँ

इस तरह से किसी दूर प्राणी तक
मेरे संदेश पहुँच जाएंगे-
मेरे भूलने के बाद भी
मुझसे खोने के बाद भी

फिर मैं शांति से कॉफ़ी पी लेता हूँ

16.6.18

सुन री

सुन री,
जब मैं बूढ़ा हो जाऊँ
तब तुम आना मुझसे मिलने

जब जवानी बीते साल बहुत हो चुके होंगे
हम दोनों के चेहरे पर झुर्रियाँ बहुत आ चुकी होंगी
जब नहीं देखेगी दुनिया हमें शक की नज़र से
तब आना मेरे साथ आइस-क्रीम खाने

अपने-अपने हिस्से का जीवन जीने के बाद
जो खाली दिन मिलेंगे
उसको रखना बचा कर हमारे लिए
हम जीयेंगे सब जो अब नहीं जी पाए

मैं तब भी बच्चे सा मिलूँगा तुम्हें
मैं तब भी बेकार चुटकुले सुनाऊँगा
नहीं चल सकेंगे बहुत देर
फिर भी
इधर उधर घूमना जो बाकी रह गया
वो सब करेंगे

या फिर नहीं भी करेंगे ये सब
और सुनेंगे बहुत देर तक कि
एक दूसरे के बिना
इस ब्रह्मांड का चक्कर लगाना कैसा था
किस किस ग्रह से टकराई तुम
कौन सा चंद्रमा मिला तुम्हें
कौन से तारे बुझ गए

जवानी में झूठ बहुत बोला एक दूसरे से
बुढ़ापे में क्यों ही झूठ बोलेंगे?
जो पल साथ बिताना था, वो तो बीत ही चुका
जो कल बचा है, वो भी ज़्यादा नहीं अब

तुम बस आ जाना

कुछ समय पहले तुम्हारा इंतज़ार बचा था
अब बुढापे का इंतज़ार बचा है

11.1.18

अनुवाद

हम सभी सिर्फ कविताओं का
अनुवाद कर रहे होते हैं
कुछ अलग भाषा से
अपनी समझने वाली भाषा में

जैसे तुम किसी दूसरी भाषा में
मुझसे कुछ कहती हो
और मैं अपनी अधपकी समझ से
उसका अनुवाद करता हूँ

जैसे मेरा अंतर
मुझसे दूसरी भाषा में
बातचीत करता है
और मैं सिर्फ उसका अनुवाद लिखता हूँ

जैसे ये सारी दुनिया
दूसरी भाषा में
पूरी देर बात करती रहती है
और सारे कवि उसका अनुवाद करते रहते हैं

बहुत कुछ अनुवाद में खो जाता है

1.2.18

रात भर जगा रहता है, सोता नहीं वो

रात भर जगा रहता है, सोता नहीं वो
दिल टूटा तो है, मगर रोता नहीं वो

किस किस को रोकोगे शहर जलाने से
सिर्फ दिखने से इंसान, होता नहीं वो

अब लोगों को पहचानना सीख लिया है
जो जितना अच्छा हो, होता नहीं वो

कौन लुटेरा, कौन दोस्त, कौन क़ातिल
वो सब जानता है, कुछ कहता नहीं वो

30.12.17

अमीरों का भी यही हाल होगा

गरीबों का तो पता है, अमीरों का भी यही हाल होगा
जो जितना दिखता है वो शायद ही उतना खुशहाल होगा

मत पूछो लुटे हुए से वो कैसे लुटा, किसने धोखा दिया
वो जितना जवाब देगा, वो उतना सवाल होगा

भविष्य सुनहरा दिखता है, शहर में शांति आ चुकी
बाकी सब बढ़िया है, सिर्फ धर्म के नाम पर बवाल होगा

नयी हुकूमत अच्छी है बस इसके कुछ शर्त हैं, जान लो
देखो, जो सच बोलेगा वो सबसे पहले हलाल होगा

तुम उसको जितना जानोगे, वो उतना ही पेचीदा हो
वो रोता भी तो है, भले ही उसका नाम निहाल होगा

30.12.17