अंतरिक्ष में संदेश

मैं एक कविता बुदबुदा रहा था
और कविता कहते कहते भूल गया

मैं एक कहानी सोच रहा था
और कहानी सोचते सोचते खो गयी

इतना कुछ खोया कि
कविता कहानी का खोना
कुछ खोना नहीं लगता

कविता का भूलना
सबसे बड़ा दुःख होता है उस दिन का
कहानी का खोना
अनकहा दर्द होता है

मैं कई दिनों तक कुछ नहीं लिखता
अपने शब्द बचा कर रखता हूँ

और एक दिन शब्दों का झुंड अंतरिक्ष में छोड़ देता हूँ

इस तरह से किसी दूर प्राणी तक
मेरे संदेश पहुँच जाएंगे-
मेरे भूलने के बाद भी
मुझसे खोने के बाद भी

फिर मैं शांति से कॉफ़ी पी लेता हूँ

16.6.18

सुन री

सुन री,
जब मैं बूढ़ा हो जाऊँ
तब तुम आना मुझसे मिलने

जब जवानी बीते साल बहुत हो चुके होंगे
हम दोनों के चेहरे पर झुर्रियाँ बहुत आ चुकी होंगी
जब नहीं देखेगी दुनिया हमें शक की नज़र से
तब आना मेरे साथ आइस-क्रीम खाने

अपने-अपने हिस्से का जीवन जीने के बाद
जो खाली दिन मिलेंगे
उसको रखना बचा कर हमारे लिए
हम जीयेंगे सब जो अब नहीं जी पाए

मैं तब भी बच्चे सा मिलूँगा तुम्हें
मैं तब भी बेकार चुटकुले सुनाऊँगा
नहीं चल सकेंगे बहुत देर
फिर भी
इधर उधर घूमना जो बाकी रह गया
वो सब करेंगे

या फिर नहीं भी करेंगे ये सब
और सुनेंगे बहुत देर तक कि
एक दूसरे के बिना
इस ब्रह्मांड का चक्कर लगाना कैसा था
किस किस ग्रह से टकराई तुम
कौन सा चंद्रमा मिला तुम्हें
कौन से तारे बुझ गए

जवानी में झूठ बहुत बोला एक दूसरे से
बुढ़ापे में क्यों ही झूठ बोलेंगे?
जो पल साथ बिताना था, वो तो बीत ही चुका
जो कल बचा है, वो भी ज़्यादा नहीं अब

तुम बस आ जाना

कुछ समय पहले तुम्हारा इंतज़ार बचा था
अब बुढापे का इंतज़ार बचा है

11.1.18

अनुवाद

हम सभी सिर्फ कविताओं का
अनुवाद कर रहे होते हैं
कुछ अलग भाषा से
अपनी समझने वाली भाषा में

जैसे तुम किसी दूसरी भाषा में
मुझसे कुछ कहती हो
और मैं अपनी अधपकी समझ से
उसका अनुवाद करता हूँ

जैसे मेरा अंतर
मुझसे दूसरी भाषा में
बातचीत करता है
और मैं सिर्फ उसका अनुवाद लिखता हूँ

जैसे ये सारी दुनिया
दूसरी भाषा में
पूरी देर बात करती रहती है
और सारे कवि उसका अनुवाद करते रहते हैं

बहुत कुछ अनुवाद में खो जाता है

1.2.18

रात भर जगा रहता है, सोता नहीं वो

रात भर जगा रहता है, सोता नहीं वो
दिल टूटा तो है, मगर रोता नहीं वो

किस किस को रोकोगे शहर जलाने से
सिर्फ दिखने से इंसान, होता नहीं वो

अब लोगों को पहचानना सीख लिया है
जो जितना अच्छा हो, होता नहीं वो

कौन लुटेरा, कौन दोस्त, कौन क़ातिल
वो सब जानता है, कुछ कहता नहीं वो

30.12.17

अमीरों का भी यही हाल होगा

गरीबों का तो पता है, अमीरों का भी यही हाल होगा
जो जितना दिखता है वो शायद ही उतना खुशहाल होगा

मत पूछो लुटे हुए से वो कैसे लुटा, किसने धोखा दिया
वो जितना जवाब देगा, वो उतना सवाल होगा

भविष्य सुनहरा दिखता है, शहर में शांति आ चुकी
बाकी सब बढ़िया है, सिर्फ धर्म के नाम पर बवाल होगा

नयी हुकूमत अच्छी है बस इसके कुछ शर्त हैं, जान लो
देखो, जो सच बोलेगा वो सबसे पहले हलाल होगा

तुम उसको जितना जानोगे, वो उतना ही पेचीदा हो
वो रोता भी तो है, भले ही उसका नाम निहाल होगा

30.12.17

मेरे पास जो था वो किस्सा...

मेरे पास जो था वो किस्सा पुराना हो गया
आओ के तुमसे मिले एक ज़माना हो गया

दरिया में उतरा तो था बच्चा ही मगर
लहरों से टकरा कर मैं सयाना हो गया

गली गली फिरता है, गीत ग़ज़ल कहता है
दुनिया पागल माने, पर वो दीवाना हो गया

मंज़िल दूर सबकी है, लेकिन चलना है
जीता वही इश्क़ में जो परवाना हो गया

5.12.17

रात भर जगने के बाद की सुबह

रात भर जग कर
सुबह को सुबह की तरह नहीं
रात की तरह ही देखता हूँ

सुबह की ठंडक
रात की नरमी सी लगती है
और सूरज
पूर्णिमा के चाँद से बेहतर
नज़र आता है

मैं
रात और दिन के चक्कर में नहीं
फँसना चाहता
मैं
अच्छे और बुरे को नहीं समझना
चाहता
मैं
जो जैसा है को वैसे ही प्राप्त करना
चाहता हूँ

लेकिन
रात भर जागने के बाद
सब कुछ वैसा नहीं रहता जैसा है
सबकुछ बदल जाता है
और मैं सबकुछ देखने के बाद
सुबह सुबह सो जाता हूँ
बिल्कुल रात 11 बजे सोने की तरह

30.10.17

मौत के बहुत करीब आ जाता हूँ

मौत के बहुत करीब आ जाता हूँ
तब एक ग़ज़ल तुमको सुनाता हूँ

कितना कुछ याद आ जाता है
कितना कुछ मैं भूल जाता हूँ

कोई और है जो इंकलाब लाएगा
मैं अब वापस घर को जाता हूँ

इत्ती सी बात और रूठ गए सभी
आओ सब, मैं तुमको मनाता हूँ

12.11.17

मेरे मरने के बाद

मेरे मरने के बाद
मुझे वैसे याद करना
जैसे एक मृत कवि को याद करते हैं

तब तुम भूल जाओगे
मेरा किया बाकि सब
मुझे मेरे शब्दों से याद करोगे

तुम मुझे सिर्फ
इस बात से याद करना
कि मैं क्या सोचता था-
प्रेम के बारे में
जीवन के बारे में
मृत्यु के बारे में
अनंत के बारे में

मुझे बाकी लोगों
कि तरह मत याद करना-
कि मैंने कितना कमाया
कितना गवांया
क्या किया
क्या नहीं कर पाया

मुझे याद करना
कि जब मैं कुछ नहीं
करता था
तो क्या करता था

मैं तुम्हारी यादों में
एक कविता बना रहना चाहता हूँ
जिसे तुम जब भी पढ़ो
किसी और को भी सुनाने का मन करे
कि मैं तुम दोनों के लिये
दो सेकेंड की मुस्कान ला सकूँ
-मरने के बाद भी

15.11.17

भ्रम

ये भ्रम
कि मैं बड़ा हूँ
बहुत बड़ा है

मेरे बड़े होने
से भी बड़ा

ये भ्रम
कि तुम छोटे हो
बहुत बड़ा है

तुम्हारे और मेरे
छोटे होने से भी बड़ा

ये सच
कि हम एक हैं
बहुत कम लोगों
को पता है

23.10.17