ग़ज़ल

मुझे वो वक़्त दे दे फिर से जो अभी मैंने खोया है
कल रात जगे हैं ख्वाब मेरे, एक सपना अब जाकर सोया है

हर इंसान के आँसू खोजते हैं एक सवाल अपनों से
कोई पूछ ले वो कौन सा खिलौना है जिसके लिए वो रोया है

मैं क्यों ना कह दूँ तेरी हर बात सच्ची है, तू खुदा है
तेरे झूठ को भी बड़ी खूबसूरती से हमने संजोया है

इसलिए कि सब कह रहे हैं झूठ मैं भी हो जाऊं झूठा
ये खेल तो प्यारा है, मगर बहुत ही झूठा है

-04.01.2014

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